Books published by Prabhat Prakashan, Delhi at best prices | Best of Prabhat Prakashan, Delhi (16 books)

Suraj Ugane Se Pahle

Suraj Ugane Se Pahle

कलह-द्वेष, घृणा-ईर्ष्या सबके सब पैठ जाते हैं मन की नाकबंदी करने के लिए। प्रेम और प्रीत का निर्वासन हो जाता है सदा-सदा के लिए। रोती फिरती है सद्भावना जंगल-जंगल। पल भर टिकने को ठौर नहीं मिलता उसे। यही सब ओछापन मुझे नहीं भाता। इनका स्पर्श भी मेरे लिए प्राणघातक है पिताजी, तब मैं अंधा हो जाऊँगा। कद बौना हो जाएगा। लिलिपुटियन बनकर रह जाऊँगा मैं। मेरे अंदर, जहाँ मेरा कोमल, सरल और सरस हृदय है, वहाँ कोई पत्थर का टुकड़ा जुड़ जाएगा। मैं आपको भी भूल जाऊँगा। माँ को भूल जाऊँगा। भाई-बहनों को भूल जाऊँगा। सारी दुनिया को भूल जाऊँगा। अपने प्यारे किसानों और मेहनती साथियों को भी याद नहीं रख पाऊँगा। मेरे अंदर कोई राक्षस, कोई दैत्य बड़े-बड़े दाँतों और बीभत्स चेहरा लिये समा जाएगा। किसी से बेईमानी और किसी से लड़ाई करूँगा। न्याय का गला घोंट अन्याय को गले लगाऊँगा। फिर अपनी ही तरह के लोगों की आबादी बढ़ाऊँगा। पूरी दुनिया का हक हड़पने की योजना बनाऊँगा और इसके बाद... —इसी संग्रह से सुरेश कांटक ऐसी कहानियाँ नहीं लिखते, जो अपने पाठकों को या तो रुला देती हैं या फिर सुला देती हैं। उनकी कहानियाँ पाठकों को जगाती और बेचैन करती हैं। ये कहानियाँ हमारी कल्पना, संवेदनशीलता और सोच को गतिशील बनाकर नैतिक दायित्व का बोध कराती हैं। बिना किसी तरह की कलाबाजी के ये कहानियाँ सहज लेकिन धारदार भाषा में गाँव की जिंदगी की हर तरह की स्थितियों और अनुभूतियों को मूर्त और सजीव रूप में हमारे सामने लाती हैं। मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकारों को दरशाती मर्मस्पर्शी कहानियाँ।

Yogiraj Gyaneshwar

Yogiraj Gyaneshwar

Personalty Development

Yugpurush Jaiprakash Narayan

Yugpurush Jaiprakash Narayan

Personalty Development

Sahasik Kahaniyan

Sahasik Kahaniyan

साहसिक कहानियाँ—रस्किन बॉण्ड

विश्‍वविख्यात लेखक रस्किन बॉण्ड द्वारा विरचित इस कहानी-संग्रह में वर्णित रहस्य एवं रोमांचपूर्ण किस्सों में पाठक को बाँधने की अद‍्भुत शक्‍ति है। इन कहानियों के पात्र अकसर खतरों को न्योता देते हैं, लेकिन वे आशावादी और दिलेर हैं, और यही कारण है कि उनके कारनामों में उनकी जिंदादिली नजर आती है। यह कहानी-संग्रह दुःसाहसी एवं बेधड़क लोगों के कारनामों को बड़े ही रोचक ढंग से आपके सामने प्रस्तुत करता है। सभी पात्र एक-से-एक बढ़कर हैं—चाहे वह एक ‘कलाबाज’ पायलट एवं छतरी सैनिक हो, हलक में तलवार उतारने में माहिर कोई हो, शेर को वश में करनेवाली कोई निर्भीक महिला हो, कोई युवा गुब्बारेबाज हो, अल केपोन गैंग का कोई बंदूकची हो या वह औरत हो, जो मशहूर ‘होप डायमंड’ लेकर आई!

पाठकवृंद इस संकलन की रोमांचक कहानियों का आनंद उठाएँगे, क्योंकि इन कहानियों से आपका मनोरंजन तो होगा ही, जीवन के बारे में भी बहुत कुछ ज्ञान प्राप्‍त होगा।

Jivan Vriksh

Jivan Vriksh

जीवन वृक्ष — डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम केवल एक योग्य व प्रतिष्ठित वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील और विचारशील कवि भी हैं। वैज्ञानिक उत्कृष्टता और काव्यमय प्रतिभा का यह संगम वास्तव में अद्भुत है। इस काव्य-संग्रह की रचनाओं में भारत और इसकी समृद्ध संस्कृति के प्रति डॉ. कलाम का विशेष प्रेम देखने को मिलता है। ईश्वर और अपनी मातृभूमि के प्रति इनके समर्पण और मानवता के प्रति अनुराग की भी इनकी कविताओं में अद्भुत अभिव्यक्ति है। अपनी क्षमता और उपलब्धियों को ईश्वर की देन मानते हुए उन्होंने उन्हें भारतवासियों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है। अपनी कविताओं के माध्यम से उन्होंने नि:स्वार्थ सेवा, समर्पण और सच्चे विश्वास का संदेश दिया है। भारतीय समाज को गहराई से जाननेवाले डॉ. कलाम अनुकंपा, तटस्थ भाव, धैर्य और सहानुभूति से समस्याओं का समाधान ढूँढ़ने की कोशिश करते हैं। जीवन के विविध रंगों और माननीय संवेदना से सज्जित डॉ. कलाम की कविताओं का यह वृक्ष एक नया विश्वास, नई छाया, नई आशाओं का संचार करेगा।

Hind Swaraj Ki Anant Yatra

Hind Swaraj Ki Anant Yatra

Personalty Development

Peer Mohammed Munis: Kalam Ka Satyagrahi

Peer Mohammed Munis: Kalam Ka Satyagrahi

"पीर मुहम्मद मूनिस ने चंपारण में निलहों के अत्याचार, रैयतों का आंदोलन और महात्मा गांधी के सत्याग्रह से बिहारी हिंदी अभियानी पत्रकारिता की नींव रखी थी। वह अभियानी हिंदी पत्रकारिता इस शख्स ने चंपारण में महात्मा गांधी को ‘प्रताप’ में रिपोर्ट किया था। मूनिस की रचनाओं को कौन कहे, मूनिस को ही भूला दिया गया—गांधी के सिर्फ चंपारण सत्याग्रह से ही नहीं, बल्कि हिंदी पत्रकारिता और साहित्य की दुनिया से भी। मूनिस मुसलमान होते हुए भी हिंदी के अनन्य सेवक थे। हिंदी-उर्दू की खाई को पाटने के प्रबल हिमायती श्री मूनिस हिंदी-उर्दू के विभाजन को अलगाववादियों की करतूत मानते थे। वह हिंदी के प्रसार के लिए रामायण मँडलियाँ बनाना चाहते थे और स्कूलों को हिंदी के विकास और पुनर्जागरण के केंद्र के रूप में विकसित करना चाहते थे। वह मुस्लिम समुदाय से आनेवाले इकलौते साहित्यकार-पत्रकार हैं, जो बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के पंद्रहवें अध्यक्ष बनाए गए थे। वह ‘देश’ के संपादक मंडल में थे। मूनिस का जन्म 1892 में हुआ था और उनकी मृत्यु 24 दिसंबर, 1949 को हुई। मूनिस सड़सठ वर्ष आन-बान और शान, लेकिन भारी अभाव में जिए। बिहार में हिंदी पत्रकारिता की नींव और आधारस्तंभ पीर मुहम्मद मूनिस की प्रतिनिधि रचनाओं का यह संकलन उनकी प्रखर सोच और लेखनी से हमारा परिचय कराएगा। बेतिया राज्य के अंतर्गत 50-60 नील की कोठियाँ यूरोपियन गोरों की है और यही लोग विशेषकर राज्य के गाँवों के ठेकेदार हैं। ये लोग अपने अधीन प्रजाओं के खेतों में से बिगहा तीन कट्ठा जमीन अपने लिए रखते हैं। इस “तीन कठिया लगान” की रीति को वहाँ की प्रजा नाजायज समझती है। इसके अतिरिक्त वहाँ पर कई प्रकार के बेगार, अमही, कटहरी (आम और कटहल के वृक्ष पर टैक्स) फगूनही (फागुन के उत्सव पर का टैक्स) हथीमही (साहिब बहादुर के हाथी खरीदने का टैक्स)मोटर-गाड़ी खरीदने का टैक्स आदि अनेकों प्रकार के टैक्स कोठी के अधीन प्रजाओं से जबरदस्ती वसूल किए जाते हैं, जिस को वहाँ की प्रजा ने अदालत में सैकड़ों बार कहा है और इन नाजायज टैक्सों के विरुद्ध अपनी पुकार भी मचाई है पर, किसकी कौन सुनता है। नक्कारखाने में तूती की आवाज की भाँति, गूँज कर ही रह जाती है। दुनिया क्या है-एक तिलिस्म खाना है। यहाँ बाप, बेटा, भाई, भतीजा, दोस्त-किसका कौन है? जब तक साँस है, तब तक सब साथी हैं; फिर कोई दो बूँद आँसू भी नहीं टपकाता। इधर लाश फूँकी, इधर अपने काम-धंधे की धुन सवार हुई। बेटा पहले ही बाँस से खोपड़ी को फोड़ देता है, स्त्रा् तुम्हारी पहनाई हुई चूड़ियाँ तोड़कर शोक करने के कर्तव्य से छुटकारा पा जाती हैं! चलो छुट्टी हुई! यार-दोस्त हँस-हँसकर दसवीं-तेरहवीं की दावतें उड़ाते हैं! कोई किसी का नहीं होता। यदि ये लोग तुम्हारे होते, तो धनुष-बाण लेकर सामने न आते। तुम्हारा तो धर्म है कि संसार को नाश होने वाला और इन वीरों को घोर शत्रु समझकर धार पर डट जाओ। धनुष का चिल्ला चढ़ा लो, तीर चुटकी से निकलो।”"

Chhote Kadam Lambi Daur

Chhote Kadam Lambi Daur

Personalty Development

Books published by Prabhat Prakashan, Delhi at best prices | Best of Prabhat Prakashan, Delhi (16 books)

Books published by Prabhat Prakashan, Delhi at best prices | Best of Prabhat Prakashan, Delhi (16 books) Price
Vivekanand Ki Atmakatha Rs. 343.0
Suraj Ugane Se Pahle Rs. 108.0
Vivek Ki Seema: Rajniti Aur Parivartan Rs. 240.0
Yogiraj Gyaneshwar Rs. 283.0
Yugpurush Jaiprakash Narayan Rs. 177.0
Sahasik Kahaniyan Rs. 205.0
Jivan Vriksh Rs. 195.0
Shiksha Ka Adhikar Rs. 170.0
Hind Swaraj Ki Anant Yatra Rs. 160.0
Peer Mohammed Munis: Kalam Ka Satyagrahi Rs. 166.0
Pratigya Rs. 195.0
Vyangya Ke Rang Rs. 128.0
Predictive Homeopathy: Rogon Ke Dabne Ka Siddhant Rs. 160.0
Chhote Kadam Lambi Daur Rs. 128.0
Kursi Tu Badhbhagini Rs. 113.0
The Jungle Book Rs. 131.0

Bot